भारत-नामीबिया सहयोग, कुंभलगढ़ अभ्यारण्य और भाशिनी-एसओआई समझौता : करेंट अफेयर्स 2026
करेंट अफेयर्स 2026 के अंतर्गत भारत-नामीबिया द्विपक्षीय संबंधों, पर्यावरण संरक्षण और डिजिटल इंडिया से जुड़ी तीन महत्वपूर्ण घटनाएं सामने आई हैं, जो UPSC, SSC, Banking, State PCS और अन्य सरकारी परीक्षाओं के लिए बेहद उपयोगी हैं।
भारत-नामीबिया के बीच रक्षा और महत्वपूर्ण खनिज सहयोग होगा और मजबूत
भारत और नामीबिया के बीच विदेश कार्यालय परामर्श (Foreign Office Consultations – FOC) का पाँचवाँ दौर 19 और 20 जनवरी 2026 को आयोजित किया गया। इस बैठक में दोनों देशों ने कई प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने पर सहमति जताई।
इस परामर्श की सह-अध्यक्षता भारत की ओर से विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव (पूर्वी एवं दक्षिणी अफ्रीका) जनेश कैन तथा नामीबिया की ओर से अंतर्राष्ट्रीय संबंध एवं व्यापार मंत्रालय के राजदूत चार्ल्स जोसोब ने की।
भारत-नामीबिया सहयोग के प्रमुख क्षेत्र
- रक्षा सहयोग
- महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals)
- व्यापार और निवेश
- स्वास्थ्य और फार्मास्यूटिकल्स
- शिक्षा और क्षमता निर्माण
- कृषि और अवसंरचना विकास
दोनों देशों ने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति व्यक्त की, जिसे समावेशी शासन और प्रभावी सेवा वितरण के लिए अहम माना गया।
रक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों को रणनीतिक जुड़ाव के उभरते क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया गया, जो आने वाले वर्षों में भारत-अफ्रीका साझेदारी को नई दिशा देंगे।
बैठक के दौरान संयुक्त राष्ट्र सहित क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया गया। अगला FOC दौर विंडहोक, नामीबिया में आयोजित किया जाएगा।
भारत-नामीबिया संबंधों को सौहार्दपूर्ण और भरोसेमंद बताया गया, और नामीबिया के मुक्ति संघर्ष के दौरान भारत के समर्थन को आज भी वहाँ सम्मान के साथ याद किया जाता है।
कुंभलगढ़ वन्यजीव अभ्यारण्य को पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र घोषित
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने राजस्थान के राजसमंद जिले में स्थित कुंभलगढ़ वन्यजीव अभ्यारण्य को पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र (Eco-Sensitive Zone – ESZ) घोषित किया है।
यह अभ्यारण्य अरावली पर्वत श्रृंखला में स्थित है और जैव विविधता संरक्षण के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र की मुख्य विशेषताएं
- अभ्यारण्य की सीमा से 0 से 1 किलोमीटर तक का क्षेत्र ESZ में शामिल
- नाजुक पारिस्थितिक तंत्रों की सुरक्षा पर विशेष जोर
- आदिवासी समुदायों की आजीविका को समर्थन
- जैविक खेती और कृषि वानिकी को प्रोत्साहन
- कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से सतत रोजगार
प्रमुख वन्यजीव और पक्षी प्रजातियां
- तेंदुआ
- धारीदार लकड़बग्घा
- भारतीय पैंगोलिन
- चिंकारा
- पेंटेड फ्रैंकोलिन सहित अनेक पक्षी प्रजातियां
इस घोषणा का उद्देश्य संरक्षण और विकास के बीच संतुलन बनाए रखना है, ताकि स्थानीय समुदायों के साथ-साथ वन्यजीवों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सके।
डिजिटल इंडिया भाशिनी और सर्वे ऑफ इंडिया के बीच महत्वपूर्ण एमओयू
20 जनवरी 2026 को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अंतर्गत डिजिटल इंडिया भाशिनी डिवीजन और सर्वे ऑफ इंडिया (SOI) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
इस सहयोग का उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित वाक् और भाषा प्रौद्योगिकियों के माध्यम से भौगोलिक स्थानों के नामों (Toponyms) का डिजिटलीकरण, प्रतिलेखन और मानकीकरण करना है।
इस समझौते की प्रमुख विशेषताएं
- राष्ट्रीय भू-स्थानिक नीति 2022 के अनुरूप कार्य
- 16 लाख से अधिक स्थानों को कवर करने वाला डेटाबेस
- भाशिनी की वाक्-से-पाठ तकनीक का उपयोग
- स्थानीय भाषाओं में सटीक नामकरण
- देवनागरी, रोमन और अन्य लिपियों में मानकीकरण
इस परियोजना के तहत क्षेत्र से एकत्र किए गए ऑडियो डेटा को डिजिटल टेक्स्ट में बदला जाएगा, जिससे राष्ट्रीय मानचित्रों, डिजिटल प्लेटफार्मों और प्रशासनिक प्रणालियों में एकरूपता सुनिश्चित होगी।
यह पहल सही उच्चारण, स्थानीय भाषाई विविधताओं के संरक्षण और भारत के भू-स्थानिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
परीक्षा दृष्टि से महत्वपूर्ण
- UPSC Prelims & Mains
- SSC, Banking और Railway Exams
- State PCS और अन्य राज्य स्तरीय परीक्षाएं
निष्कर्ष: भारत-नामीबिया रणनीतिक सहयोग, कुंभलगढ़ अभ्यारण्य की ESZ घोषणा और भाशिनी-एसओआई समझौता, तीनों ही घटनाएं भारत की विदेश नीति, पर्यावरण संरक्षण और डिजिटल गवर्नेंस की दिशा को स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं।