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जनवरी 2025 करंट अफेयर्स: भारत की कूटनीतिक मेजबानी से लेकर रक्षा, कर संग्रह और मत्स्य पालन में बड़ी उपलब्धियां

जनवरी 2025 का महीना भारत के लिए कई अहम घटनाओं और उपलब्धियों का साक्षी बना है।
अंतरराष्ट्रीय संसदीय सम्मेलन की मेजबानी, स्वदेशी रक्षा तकनीक की सफलता,
प्रत्यक्ष कर संग्रह में वृद्धि और मत्स्य पालन क्षेत्र की मजबूत प्रगति
इन सभी ने देश की आर्थिक और रणनीतिक स्थिति को और सुदृढ़ किया है।
नीचे इन प्रमुख घटनाओं का विस्तृत और सरल विवरण दिया गया है।

भारत करेगा राष्ट्रमंडल अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन की मेजबानी

भारत 14 जनवरी 2025 से राष्ट्रमंडल के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के
28वें सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है।
यह तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन नई दिल्ली में आयोजित होगा,
जिसका समापन 16 जनवरी 2025 को होगा।

इस सम्मेलन में 60 से अधिक राष्ट्रमंडल देशों के संसद अध्यक्षों और
पीठासीन अधिकारियों के शामिल होने की संभावना है।
इसके साथ ही अर्ध-स्वायत्त संसदों के प्रतिनिधि भी इसमें भाग लेंगे।
सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य संसदीय लोकतंत्र को मजबूत करना
और विधायी संस्थाओं के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है।

सम्मेलन की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला करेंगे।
पहले दिन राष्ट्रमंडल सम्मेलन की स्थायी समिति की बैठक आयोजित की जाएगी,
जिसकी अध्यक्षता भी ओम बिरला करेंगे।

15 जनवरी 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में सम्मेलन का औपचारिक उद्घाटन करेंगे।
सम्मेलन के समापन के बाद
सीएसपीओसी की अध्यक्षता
ब्रिटेन के हाउस ऑफ कॉमन्स के अध्यक्ष
लिंडसे होयल को सौंप दी जाएगी।

डीआरडीओ ने तीसरी पीढ़ी की स्वदेशी एंटी-टैंक मिसाइल का सफल परीक्षण किया

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने
तीसरी पीढ़ी की मानव-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल
(MPATGM) का सफल परीक्षण किया है।
यह परीक्षण महाराष्ट्र के अहिल्या नगर स्थित
केके रेंज में एक गतिशील लक्ष्य पर किया गया।

यह मिसाइल अत्याधुनिक फायर-एंड-फॉरगेट मार्गदर्शन प्रणाली पर आधारित है
और शीर्ष-हमला क्षमता से लैस है,
जिससे यह आधुनिक मुख्य युद्धक टैंकों को नष्ट करने में सक्षम है।

एमपीएटीजीएम पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से विकसित की गई है।
इसमें लक्ष्य की पहचान के लिए
इमेजिंग इन्फ्रारेड होमिंग सीकर का उपयोग किया गया है।
यह दोहरे वारहेड से लैस है,
जो भारी बख्तरबंद सुरक्षा को भी भेदने में सक्षम है।

मिसाइल में पूरी तरह विद्युत-संचालित नियंत्रण प्रणाली
और भारत में विकसित प्रणोदन तंत्र लगाया गया है।
इसका उपयोग दिन और रात दोनों समय किया जा सकता है।
इसे तिपाई या सैन्य वाहन पर लगे लॉन्चर से दागा जा सकता है।

भारत के शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह में 8.82 प्रतिशत की बढ़ोतरी

जनवरी के मध्य तक भारत के शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह में
8.82 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
आयकर विभाग के अनुसार,
11 जनवरी 2025 तक शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह
₹18.38 लाख करोड़ से अधिक हो चुका है।

इस अवधि में कॉरपोरेट कर प्राप्तियां
लगभग ₹8.63 लाख करोड़ पर स्थिर रहीं,
जबकि व्यक्तिगत करदाताओं का योगदान
कुल कर संग्रह में मजबूत बना रहा।

प्रतिभूति लेनदेन कर से प्राप्त राजस्व
सक्रिय और मजबूत पूंजी बाजार का संकेत देता है।
साथ ही पिछले वर्ष की तुलना में
कर वापसी में लगभग 17 प्रतिशत की गिरावट आई,
जिससे शुद्ध कर संग्रह को बढ़ावा मिला।

सकल प्रत्यक्ष कर प्राप्तियों में
लगभग 4.14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
सरकार को वित्त वर्ष 2025-26 में
प्रत्यक्ष कर राजस्व में और तेज वृद्धि की उम्मीद है।
इस दौरान 12.7 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया गया है।

सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए
₹78,000 करोड़ का एसटीटीटी लक्ष्य निर्धारित किया है।

मत्स्य पालन क्षेत्र में ऐतिहासिक वृद्धि, भारत बना वैश्विक शक्ति

भारत में मछली उत्पादन
2013-14 में 95 लाख टन से बढ़कर
2024-25 में 198 लाख टन तक पहुंच गया है।
इस अवधि में उत्पादन में
106 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।

मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्र
देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
यह क्षेत्र लगभग तीन करोड़
मछुआरों और मछली पालकों को आजीविका प्रदान करता है।

वर्तमान में भारत
विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है।
वैश्विक मछली उत्पादन में
भारत का योगदान लगभग आठ प्रतिशत है।

सरकार द्वारा मत्स्य पालन क्षेत्र के आधुनिकीकरण
और विस्तार के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं।
वर्ष 2014-15 से अब तक
इस क्षेत्र के लिए लगभग ₹32,723 करोड़ की
वित्तीय स्वीकृति दी जा चुकी है।

प्रमुख योजनाओं में
ब्लू रिवोल्यूशन,
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना
और प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना
शामिल हैं।

समुद्री खाद्य निर्यात में नया रिकॉर्ड

भारत के समुद्री खाद्य निर्यात ने
2024-25 में अब तक का
सर्वाधिक स्तर हासिल किया है।
चालू वित्त वर्ष के दौरान
समुद्री खाद्य निर्यात से
लगभग ₹62,408 करोड़ की आय हुई है।

यह उपलब्धि वैश्विक बाजार में
भारतीय समुद्री उत्पादों की
बढ़ती मांग और गुणवत्ता को दर्शाती है।

ये सभी घटनाएं न केवल
भारत की आर्थिक और रणनीतिक मजबूती को दर्शाती हैं,
बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं और
सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए
भी बेहद महत्वपूर्ण करंट अफेयर्स बनती हैं।

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